कभी मदहोशी में आकर,हमने 1 नजराना लिखा,
शम्मा के दीवाने को परवाना लिखा,
कभी पूछते हैं लोग,ये दीवानगी क्या होती है?
तब ,ज़ोया के दीवाने को,परवाना हमने लिखा।
तेरी आँखों मे,फैली गहराई देखी है, एक मुस्कान के पीछे कि,रुसवाई देखी है, देखा सबने महफ़िल में,चाँद को सितारों के बीच, 1 हमने महफ़ि...
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