बहोत नींद है,मेरी आँखों मे "गालिब"
बस ..किसी की याद,हमे सोने नही देती,
वो पराई होकर भी अपनी सी है और,
हमें, खुद होकर भी,खुद का होने नहीं देती
तेरी आँखों मे,फैली गहराई देखी है, एक मुस्कान के पीछे कि,रुसवाई देखी है, देखा सबने महफ़िल में,चाँद को सितारों के बीच, 1 हमने महफ़ि...
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