बहोत नींद है,मेरी आँखों मे "गालिब"

बहोत नींद है,मेरी आँखों मे "गालिब"

बस ..किसी की याद,हमे सोने नही देती,

वो पराई होकर भी अपनी सी है और,

हमें, खुद होकर भी,खुद का होने नहीं देती

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