कुछ तक़दीर में उलझे हुए,जुछ तकदीर के सहारे है

कुछ ज़िन्दगी के फैसले है,कुछ अपने अफ़साने हैं,

कुछ तक़दीर में उलझे हुए,कुछ तकदीर के सहारे है।

करें शिकवा अब किससे अपनी,जब सबकी यही कहानी है,

कुछ लहरों में डूबे हुए,कुछ साहील के सहारे हैं।



Vocabulary:.

साहील:Bank of river

No comments:

Post a Comment

चाँद कि तन्हाई

तेरी आँखों मे,फैली गहराई देखी है, एक मुस्कान के पीछे कि,रुसवाई देखी है, देखा सबने महफ़िल में,चाँद को सितारों के बीच, 1 हमने महफ़ि...