आगाज़ होता है मगर,अंजाम नही होता

आगाज़ होता है मगर,अंजाम नही होता,
हर लफ्ज़ का 1 ही पैगाम नही होता

नज़र तय करती है,कीमत नज़राने की,
हर हाथ मे उसका,वही दाम नही होता।

हयात का अंत होता है पर,
रूह का इंतकाल नही होता

दफन होता है,राख होता है,
हर जिस्म का 1 ही ,हिज़ाब नही होता।

रेशम से हो रिश्ते जहां,
वहां गिरह का अरमान नही होता

चटख भी जाये जो शीशा किसी छोर पे,
हंसी चेहरे का फिर वहाँ ,दीदार नही होता।

जरूर बेजुबान हैं लोग यहाँ के,
जहाँ, गैरों के जुल्म पे आवाज नही होता,

खामोश होता है ज़रूर हर गूँगा
हर गूँगा मगर, बेजुबां नही होता।

सिरत अगर अच्छी हो,तो हर सूरत प्यारी लगती है,
यूँही 1 पत्थर का टुकड़ा,चाँद नही होता

ज़रूर ढलता है ,हर शाम सूरज,
हर रात मगर,वही चाँद नही होता।

बहोत होते है,हिस्सेदार ज़िन्दगी के,
हर  ज़िन्दगी में मगरअपना, हिस्सा नही होता

 बड़ी मन्नतों से सोती हैं,हर रात आँखें मेरी,
हर दिन जाग जाता हूँ पर,ज़िंदा नही होता।



Vocabulary:
1.आगाज़:Start
2.लफ्ज़:Words
3.नज़राने:Gift
4.हयात:Life
5.इंतकाल:Death
6.हिज़ाब:Dressing
7.गिरह:Knot
8.दीदार:Look, appearance

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