जले जब कोई परवाना

सुबह के अंत पर,शाम की चादर चढ़ जाती है,
कर के मोहब्बत किसी और से,किसी और कि वो हो जाती है,
सच है यारों,
जले जब कोई  परवाना, तो शम्मा की रोशनी बढ़ जाती है

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