सुबह के अंत पर,शाम की चादर चढ़ जाती है,
कर के मोहब्बत किसी और से,किसी और कि वो हो जाती है,
सच है यारों,
जले जब कोई परवाना, तो शम्मा की रोशनी बढ़ जाती है
तेरी आँखों मे,फैली गहराई देखी है, एक मुस्कान के पीछे कि,रुसवाई देखी है, देखा सबने महफ़िल में,चाँद को सितारों के बीच, 1 हमने महफ़ि...
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