इस क़दर मुझमे इतनी आग न होती

इस क़दर मुझमे इतनी आग न होती,

अगर, तू बेवफा न होती,

1 समन्दर सा ,भर देता इन निगाहों में तेरी,

ग़र, तू कभी मेरी,मोहब्बत न होती।

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