अब बहका है दिल, तो बहक जाने दे

अब बहका है दिल, तो बहक जाने दे, 
लम्हों को दिल में ,उतर जाने दे,
कुछ कहतीं है ,खामोश नजरें भीं,
 मेरी सुन ..इन्हें सब कह जाने दे।
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आँखें भिगोती है काजल,तो भिग जाने  दे,
ये दरिया इश्क का,बह जाने दे,
क्यूँ डरे तू सोचकर ,कि आगे क्या होगा?
डर मत,मोहब्बत होती है अगर तो हो जाने दे।

क्यूँ हर लफ्ज को,तू आवाज दे, 
कुछ, इन लम्हों को भी कह जाने  दे, 
ये ,मदहोशी के सूरज की आँच है,
आग मे,इसकी जल जाने दे।

कई जन्मों से बंदी है,हसरत दिल की,
आज बगावत कर जाने दे,
क्यूँ थामे तू,दामन मन का,K
मन को मन की, कर जाने दे।

न जाने,कब से लगी है आग सीने मे,
है शोला इश्क का,भड़क जाने दे,
आज इन बाहों के दरम्याँ, 
ये मोम सा जिस्म पिघल जाने दे।

लबों को लबों से छू जाने दे,
आँसू को तेरे,मुझे पी जाने दे,
धड़कन करती है शिकायत,तो कर जाने दे,
दो जिस्मों मगर आज ,एक हो जाने दे।

बड़ी मुद्दत से निकला है,चाँद मेरा,
आज ,थोडा़ प्यार जताने दे,
ऐ रात जरा,थमथम के गुजर,
चाँदनी को नूर बरसाने  दे।

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