1 चाँद की चाँदनी

जाने किन लम्हों में,बादलों से बरसात हो गई,
अभी तो दिन था,अभी रात हो गई,
लगता है बादलों कि, तारों से कुछ ऐसी बात हो गई,
1 चाँद की चाँदनी, कैसे ज़मीन के साथ हो गई।

सूरज भी खफा हैं ,देखो,
कितनी तेज आंच हो गई,
1 चाँद की चाँदनी, कैसे ज़मीन के साथ हो गई।

जिक्र ,बहारों में भी है,
फिक्र, नज़ारों को भी हो गई
1 चाँद की चाँदनी, कैसे ज़मीन के साथ हो गई।

फूलों को गिला है कि शबनम,पत्ती के साथ सो गई,
कांटो को गिला है कि खुशबू ,महज खास हो गई,
पत्ते पत्ते को गिला है,बड़ी गज़ब बात हो गई,
1 चाँद की चाँदनी, कैसे ज़मीन के साथ हो गई।

शाम खफा है कि, सहर अज़ानों में ढल गई,
सुबह खफा है कि, शाम शरारों में ढल गई,
ज़र्रा -ज़र्रा खफा है ये,कौन सी बात हो गई,
1 चाँद की चाँदनी, कैसे ज़मीन के साथ हो गई।

परिंदे भी नाराज़ कि बैर, दरख्तों से हो गई,
1 चाँद की चाँदनी, कैसे ज़मीन के साथ हो गई।


Vocabulary:
1:शरारा-Spark 
2:सहर-Morning
3:शबनम-Dew
4:दरख्तों-Trees

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