लफ़्ज़ों का जाम,अल्फ़ाज़ों की शाम

लफ़्ज़ों का जाम,अल्फ़ाज़ों की शाम,

कागज़ के गीत,स्याही के अरमान,

सब कुछ यहाँ.. तेरी मुस्कान के खातिर,

          बता ?क्या-क्या करूँ,तेरी मोहब्बत के नाम ?

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तेरी आँखों मे,फैली गहराई देखी है, एक मुस्कान के पीछे कि,रुसवाई देखी है, देखा सबने महफ़िल में,चाँद को सितारों के बीच, 1 हमने महफ़ि...