दिल ने कर ली दिल्लगी, ये कसूर बस मेरा इतना है

दिल ने कर ली दिल्लगी, ये कसूर बस मेरा इतना है,

बहोत चाहनेवाले हैं उसके,ये ग़ुरूर उसको इतना है,

बस वक़्त उसके साथ है,जो मगरूर हुस्न में इतना है,

वरना पत्थर की दुनिया में, शीशे का वजूद ही कितना है।

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