नवाबों के शहर से हो,थोड़ी नज़ाकत तो करो,
अपनी खामोश होंठों से,बगावत तो करो,
क्या जानो,कब से बैठी हैं पलकें, इंतज़ार में तुम्हारी,
अरे, तारीफ ना सही कभी, शिकायत तो करो।
तेरी आँखों मे,फैली गहराई देखी है, एक मुस्कान के पीछे कि,रुसवाई देखी है, देखा सबने महफ़िल में,चाँद को सितारों के बीच, 1 हमने महफ़ि...
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