दो कदम का फासला,फिर भी कितनी दूरी है

ये कैसा किस्सा प्यार का,ये कैसी मज़बूरी है?

दो कदम का फासला,फिर भी कितनी दूरी है,

है नज़र के सामने फिर भी ,आँखे उनकी सूरी हैं,

लम्हा-लम्हा पूरा है पर,बात सारी अधूरी है।




Vocabulary:

सूरी:Blind

No comments:

Post a Comment

चाँद कि तन्हाई

तेरी आँखों मे,फैली गहराई देखी है, एक मुस्कान के पीछे कि,रुसवाई देखी है, देखा सबने महफ़िल में,चाँद को सितारों के बीच, 1 हमने महफ़ि...