याद-ए-लहर दरिया में कोई,टूटी कश्ती बचाये तो बचाये कैसे?
तिनका-तिनका रूठने लगे तो,तिनका-तिनका मनाये कैसे?
दिल,दर्द का इज़हार भी,अब बार-बार करता है,
कबूतर ,इश्क़ का उतारे भी तो,उतारे कैसे?
तेरी आँखों मे,फैली गहराई देखी है, एक मुस्कान के पीछे कि,रुसवाई देखी है, देखा सबने महफ़िल में,चाँद को सितारों के बीच, 1 हमने महफ़ि...
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