याद-ए-लहर दरिया में कोई,टूटी कश्ती बचाये तो बचाये कैसे?

याद-ए-लहर दरिया में कोई,टूटी कश्ती बचाये तो बचाये कैसे?

तिनका-तिनका रूठने लगे तो,तिनका-तिनका मनाये कैसे?

दिल,दर्द का इज़हार भी,अब बार-बार करता है,

कबूतर ,इश्क़ का  उतारे भी तो,उतारे कैसे?

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