तेरे मोहब्बत की अभी,एक आस बाकी है,
है दरिया सी जिंदगी मगर,प्यास बाकी है,
ये जो दूरी है,तेरे मेरे निगाहों की,
उनमे चाहत का इकरार बाकी है,
तेरे मोहब्बत की अभी,एक आस बाकी है।
जिन हाथों ने तोड़े,गुलाब दिल के,
उन हाथों के,मेहँदी कि महक बाकी है,
अभी तो टूटा है गुलाब दिल का,
अभी तो काँटो कि ,राह बाकी है,
तेरे मोहब्बत की अभी,एक आस बाकी है,
तेरे सासों मे उलझे,एहसास मेरे,
तेरे बातों मे बहके,जजबात मेरे,
इन उलझे-बहके अरमानो कि,उडा़न अभी बाकी है,
तेरे मोहब्बत की अभी,एक आस बाकी है,
ये जो अनकही है,तेरे -मेरे लबों कि,
उन खामोश लफ्जों कि,बात बाकी है,
अभी तो भड़का है,शोला इश्क का,
अभी तो उसकी तपन बाकी है,
तेरे मोहब्बत की अभी,एक आस बाकी है,
जो लम्हा-लम्हा कुदेरे हैं,
तेरी यादों ने जख्म मेरे,
उन जख्मों कि ,आह अभी बाकी है,
तेरे मोहब्बत की अभी,एक आस बाकी है,
जिन नजरों ने कत्ल किया,
कतरा-कतरा धड़कन को,
मेरी आँखों को उसकी ,तलाश बाकी है,
तेरे मोहब्बत की अभी,एक आस बाकी है,
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