बात करनी थी,बात कौन करे ?

बात करनी थी,बात कौन करे ?
लफ़्ज़ों कि ख़ामोशी को,बयाँ कौन करे ?
वो अपने ग़ुरूर में जिंदा,मैं अपने सुरूर में,
बात ठहरी इसपे,कि पहले कौन करे ?
बात करनी थी,बात कौन करे ?

उसकी नज़र की तलाश मुझको,मेरी नजर का एहसास उसको,
है नज़रों के सामने फिर भी,है नजारों की तलाश हमको,
हो दिलों में शिकवे फिर,नज़राना कौन करे ?
बात करनी थी,बात कौन करे,

वो मुझसे ख़फ़ा, मैं किस्मत से,
मैं खुद से जुदा, वो मुझसे,
वक़्त की इस रंजिश से,रिहाई कौन करे ?
बदले इन हालातों पे ,रुसवाई कौन करे ?
बात करनी थी,बात कौन करे ?

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